गर्मियों का मौसम आते ही भारत के शहर एक भट्टी में तब्दील हो गए हैं। जून 2026 के अंतिम सप्ताह में, दिल्ली का अधिकतम तापमान 52.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो शहर का सर्वकालिक उच्च रिकॉर्ड है। पिछले 125 साल में ऐसी गर्मी कभी नहीं देखी गई। मुंबई में तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि बेंगलुरु में भी तापमान 38 डिग्री को छू गया। लखनऊ, कानपुर, और राजस्थान के शहरों में यह और भी गंभीर है। इस भीषण गर्मी ने भारत के शहरों में एक स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है। बिजली की कटौती, पानी की कमी, और हीटस्ट्रोक के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। दिल्ली के सभी अस्पतालों में हीटस्ट्रोक के रोगियों से भीड़ है। इस साल अकेले दिल्ली में हीटस्ट्रोक से 143 लोगों की मौत हो चुकी है। महिलाएं, बुजुर्ग, और दैनिक मजदूरी करने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। UN की पर्यावरण रिपोर्ट (2024) के अनुसार, वैश्विक तापमान पिछले 50 सालों में सबसे अधिक बढ़ा है। भारत इससे विशेषकर प्रभावित हो रहा है क्योंकि यह भूमध्य रेखा के करीब है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़े चिंताजनक हैं। 1990 से 2026 के बीच, भारत के शहरों में तापमान में औसतन 0.94 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। जुलाई 2026 में भारत के शहरों में बिजली की मांग 220 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो रिकॉर्ड है। दिल्ली में दिन में 5-6 घंटे की बिजली कटौती हो रही है। गर्मी से पानी की खपत भी बढ़ जाती है। दिल्ली के कई इलाकों में पानी की सप्ताह में एक या दो दिन की आपूर्ति हो रही है। नर्मदा और यमुना जैसी नदियों में पानी का स्तर सामान्य से 40-50% कम है। भूजल भी तेजी से समाप्त हो रहा है। गर्मी से केवल हीटस्ट्रोक ही नहीं, बल्कि अन्य बीमारियां भी बढ़ रहीं हैं। श्वसन संबंधी समस्याएं, त्वचा रोग, आंखों की समस्याएं, और डिहाइड्रेशन के मामलों में भारी वृद्धि हुई है। गर्मी से धूल भरी हवाएं और प्रदूषण भी बढ़ता है। दिल्ली जून-जुलाई में भी AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 200 के पास पहुंच जाता है। कृषि पर भी प्रभाव पड़ रहा है। किसानों की फसलें जल जाती हैं। दूध देने वाली गायें गर्मी से मर जाती हैं। यह केवल इस साल की समस्या नहीं है। विश्व बैंक की रिपोर्ट से पता चलता है कि यदि जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित नहीं किया गया, तो 2050 तक दिल्ली, मुंबई, और कोलकाता जैसे शहरों में गर्मी इतनी गंभीर हो सकती है कि बाहरी काम करना असंभव हो जाए। सरकार गर्मी के मौसम में हीट एक्शन प्लान चलाती है। दिल्ली में “कूलिंग सेंटर्स” खोले गए हैं जहां लोग दिन भर रह सकते हैं। कुछ स्कूलों को खाली कर दिया गया है ताकि लोग वहां सो सकें। जलवायु विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत को वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन को कम करने में नेतृत्व देना चाहिए। भारत सरकार ने 2070 तक कार्बन निरपेक्षता का लक्ष्य रखा है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि यह पर्याप्त नहीं है। आंतरिक रूप से भी, भारत को सौर ऊर्जा में अधिक निवेश करना चाहिए, शहरों में अधिक हरियाली बढ़ानी चाहिए, और जल संरक्षण योजनाएं शुरू करनी चाहिए। 2026 की भीषण गर्मी भारत के लिए एक गंभीर सतर्कता संकेत है। यदि अभी कार्रवाई नहीं की गई, तो 2050 तक भारत के शहर रहने योग्य नहीं रह सकते। Post navigation भारत की स्वास्थ्य सेवा 2026 में सुधार की नई चुनौतियों का सामना कर रहा है