भारत के सामने ऊर्जा का संकट एक दीर्घकालिक समस्या है। तेजी से बढ़ती जनसंख्या और औद्योगीकरण के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रहीं है। 2026 में, भारत की बिजली की मांग 250 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो 2015 में केवल 150 गीगावाट थी। यह दर्शाता है कि कितने तेजी से भारत की ऊर्जा खपत बढ़ रहीं है।

भारत की बिजली प्रणाली में कोयले का वर्चस्व रहा है। 2015 में, भारत की कुल बिजली का 70% कोयले से आती थी। लेकिन कोयले के उपयोग से भारी प्रदूषण होता है। दिल्ली, मुंबई, और अन्य शहरों में वायु प्रदूषण बहुत गंभीर है, और कोयले आधारित बिजली घर इसका एक मुख्य कारण हैं।

2026 में, भारत सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है – 2030 तक 500 गीगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना। यह एक बहुत बड़ा लक्ष्य है, लेकिन भारत इसी दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

सौर ऊर्जा भारत की नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम का मुख्य केंद्र है। 2026 में, भारत विश्व में सौर ऊर्जा के मामले में तीसरे स्थान पर है (चीन और अमेरिका के बाद)। भारत की सौर क्षमता 2016 में 6 गीगावाट थी, जो 2026 में 120 गीगावाट तक पहुंच गई है। यह वृद्धि चमत्कारिक है। घरों की छतों पर लगे सोलर पैनल अब एक आम दृश्य है।

“सूर्य मित्र” और अन्य सोलर योजनाओं के तहत, गरीब परिवारों को भी सोलर पैनल लगवाने में मदद दी जा रहा है। 2026 में, भारत में 10 मिलियन घरों पर सोलर पैनल लगे हैं। ये घरों को न केवल बिजली देते हैं बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर घर के मालिकों को आय भी दिलाते हैं।

पवन ऊर्जा भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है। राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात, और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में बड़े पवन ऊर्जा संयंत्र लगे हैं। 2026 में, भारत की कुल बिजली का लगभग 11% पवन ऊर्जा से आता है। समुद्री पवन ऊर्जा (Offshore Wind Energy) पर भी काम शुरू हो गया है।

जलविद्युत ऊर्जा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है, लेकिन अब इसकी विकास गति धीमी है क्योंकि अधिकांश अच्छी जलविद्युत परियोजनाओं का विकास हो चुका है। 2026 में, जलविद्युत ऊर्जा भारत की कुल क्षमता का 15% है।

बायोमास और अन्य नवीकरणीय स्रोत भी महत्वपूर्ण हैं। कृषि अवशेष को जलाकर बिजली बनाई जा रहा है। यह किसानों को आय भी दे रहा है और पराली जलाने की समस्या को भी कम कर रहा है।

भारत की बिजली उत्पादन क्षमता 2016 में 300 गीगावाट थी, जो 2026 में 450 गीगावाट तक पहुंच गई है। हालांकि, मांग अभी भी आपूर्ति से अधिक है। 2026 में भी, भारत को 50-60 गीगावाट की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

ऊर्जा दक्षता में भी सुधार हो रहा है। LED बल्बों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में भी ऊर्जा बचाव को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह बिजली की मांग को कम करने में मदद कर रहा है।

2026 में, भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चुनौती है। अगर भारत को अपनी ऊर्जा समस्या को हल करना है, तो नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश को जारी रखना होगा, ऊर्जा दक्षता बढ़ानी होगी, और पुरानी बिजली घरों को बंद करना होगा।

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